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वसुंधरा
Saturday, October 25, 2008
स्वयं से
यह जीवन निस्सार है तब तक जब तक वह पूर्णता को प्राप्त नहीं हो जाता, इसका मिलन उस आसीम से नहीं हो जाता जो प्रेम व घृणा से अलग है,जहा जाकर विचारो की श्रृंखला समाप्त हो जाती है,पूर्ण आनद की स्थिति होती है.
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जीवन संगीत
स्वयं से
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कौशलेंद्र मिश्र
हिंदी पञकारिता में शोध और संभावनाओं की तलाश में निरंतर सक्रिय.
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