Wednesday, November 23, 2011

मेडिकल कचरे कितने खतरनाक पर हम हैं अनजान

हरी हरी हो वसुंधरा, हरी भरी हो हर डगर। ऐसा भला कौन नहीं चाहेगा। हम मेडिकल कचरों के बीच कितनी असुरछित जीवन जी रहे हैं इसका कोई अनुमान नहीं। सिर्फ शहर ही मेडिकल कचरों के अम्बार पर नहीं हैं बल्कि इन्हें जहा उठा कर फेका जा रहा हैं। वो ग्रामीण छेत्र भी असुरछित हैं। सिर्फ बिहार के आकड़ो को खगालना शुरु किया तो हैरत से भर गया। तीन हजार किलो से ज्यादा मेडिकल कचरे प्रति वर्ष यहाँ से निकल रहे हैं। इसमें से ६०० किलो कचरे का उचित निपटारा नहीं हो रहा। ये तो एक बात हुई, दूसरी बात जो काबिले गौर हैं वो यह कि ये तो सिर्फ मेडिकल कचरे की बात हैं, इनका सही तरीके से निपटारा व संग्रहण नहीं होने के कारण लाखो टन सामान्य कचरा भी संक्रमित हो कर मेडिकल कचरे के समान खतरनाक हो जाता हैं । मेडिकल कचरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बकायदा निर्देश जरी कर रखा हैं लेकिन इसको लेकर शायद ही कोई सरकार या आम लोग चिंतित रहते हैं। यह बेहद अफसोस की बात हैं कि विकसित राज्यों में तो थोड़ी बहुत जागरूकता भी हैं लेकिन उनकी तुलना में शेष राज्यों में कोई विशेष पहल नहीं कि जा रही हैं । आइये हम सब मिल कर चेतना जगाये , लोग सजग हो।

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